Sita Navami 2024 : सीता नवमी पर जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सम्पूर्ण जानकारी

Sita Navami 2024: सीता जयंती 16 मई को मनाई जाएगी हमारे पुराणों में जिन आदर्श नारियों का उल्लेख मिलता है, उनमें से एक हैं माता सीता। श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी के ठीक एक महीने बाद उनकी अर्धांगिनी माँ सीता का जन्मोत्सव आता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता नवमी मनाई जाती है। इसे जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है

Sita Navami 2024 : सीता नवमी

  • इस वर्ष सीता नवमी 6 मई 2024, गुरुवार को मनाई जाएगी।
  • सीता नवमी मध्याह्न उत्सव – 10:34 प्रातः से 01:15 दोपहर
  • सीता नवमी मध्याह्न का क्षण – 11:54 प्रातः
  • नवमी तिथि निर्धारण – 6 मई 2024 को 06:20 पूर्वाह्न
  • नवमी तिथि समापन – 17 मई 2024 को 08:48 प्रातः

इस आसान विधि से करें सीता नवमी की पूजा वैशाख माह में आने वाली सीता नवमी की पूजा अत्यंत फलदायक मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो कन्याएं सीता नवमी पर विधि-विधान से माता सीता की पूजा करती हैं, उन्हें सीता माता की कृपा से मनोवांछित वर मिलता है और वे आजीवन सौभाग्यवती रहती हैं।

पूजा की तैयारी

  1. सीता नवमी के दिन प्रातः जल्दी उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं।
  2. इसके बाद पानी में गंगाजल या एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करें।
  3. दैनिक पूजा करें और यदि आप व्रत रख रहें है तो व्रत का संकल्प लें।
  4. अब सभी पूजन सामग्री एकत्रित करें, पूजन स्थल को साफ करके शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें

पूजा सामग्री

चौकी, फूल, पीला वस्त्र, माला माता सीता व श्रीराम की तस्वीर , मौली/कलावा, आरती की थाल, सुहाग का सामान, जलपात्र, दक्षिणा, प्रसाद में ऋतुफल या नारियल, हल्दी-कुमकुम-अक्षत, धुप-दीपक

पूजा विधि

  1. सबसे पहले चौकी स्थापित करें, और इसके सामने आसन लगाकर बैठ जाएं।
  2. इस चौकी पर थोड़ा सा गंगाजल छिड़ककर इसे शुद्ध करें। अब इसपर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
  3. अब चौकी पर या इसके पास में एक दीपक प्रज्वलित करें।
  4. कुछ अक्षत का आसन देकर सीता माता और श्री राम की तस्वीर/मूर्ति स्थापित करें। आप चाहे तो रामदरबार की तस्वीर भी ले सकते हैं।
  5. इसके बाद जलपात्र से एक फूल की सहायता से जल लेकर सीता-रामजी पर स्नान के रूप में जल छिड़कें।
  6. अब ॐ श्री सीताय नमः, ॐ श्री रामाय नमः के जाप के साथ सीता जी को हल्दी कुमकुम और हो सकें तो नारंगी सिंदूर लगाएं।
  7. राम जी को कुमकुम चन्दन और अक्षत का तिलक लगाएं।
  8. साथ ही रामदरबार के अन्य देवों को भी तिलक करें।

9 अब सियारामजी को वस्त्र के रूप में मौली/कलावा अर्पित करें। इसके बाद फूल और माला अर्पित करें। माता सीता को सभी सुहाग का सामान अर्पित करें। इसके बाद धुप-सुंगधि जलाएं।

  1. इस पूरी पूजा में ॐ श्री सीताय नमः, ॐ श्री रामाय नमः का जप करते रहें।
  2. अब भोग के रूप में ऋतुफल, नारियल और मिठाई चढ़ाएं। क्षमतानुसार दक्षिणा को भी चौकी पर देवी सीता के सामने रखें।
  3. अंत में माता सीता और श्रीराम जी की आरती करें।
  4. आरती सम्पन्न करके सियाराम जी को नमन करें और उनसे पूजा भी हुई किसी भी तरह की भूल के लिए माफ़ी मांगे।
  5. अब सबमें प्रसाद बांटें और खुद भी प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के अगले दिन दान करने जैसी सामग्री को दान कर दें, बची हुई सामग्री को विसर्जित करदें।

Pandit Anupam Sharma Ujjain | श्री कृष्णा वाणी

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